Freedom Fighters Of India: Contributions (1857-1947)

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Freedom Fighters Of India: Contributions (1857-1947)

नमस्ते! क्या आप 1857 से 1947 तक के भारत के महान स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानना चाहते हैं? यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण विषय है जो हमें हमारे देश के गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है। इस लेख में, हम आपको उन वीर आत्माओं के बारे में विस्तार से बताएंगे जिन्होंने भारत की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया। आइए, उनके योगदान और प्रेरणा को समझें।

सही उत्तर

भारत के स्वतंत्रता सेनानी (1857-1947) वे महान व्यक्ति थे जिन्होंने ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, जिन्होंने अहिंसक प्रतिरोध, सशस्त्र विद्रोह, राजनीतिक कूटनीति और सामाजिक सुधारों के माध्यम से देश को आजाद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विस्तृत व्याख्या

1857 से 1947 तक का काल भारतीय इतिहास में 'स्वतंत्रता संग्राम' के नाम से जाना जाता है। यह वह समय था जब भारत के वीर सपूतों ने अपनी मातृभूमि को ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए अथक प्रयास किए। इन स्वतंत्रता सेनानियों में हर वर्ग, हर क्षेत्र, हर विचारधारा के लोग शामिल थे, लेकिन उनका लक्ष्य एक ही था - 'आज़ाद भारत'।

मुख्य अवधारणाएँ

1. 1857 का विद्रोह: एक चिंगारी

1857 का विद्रोह, जिसे 'प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' भी कहा जाता है, भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण मोड़ था। हालांकि यह विद्रोह असफल रहा, इसने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी और भारतीयों में राष्ट्रीयता की भावना को जागृत किया।

  • मंगल पांडे: एक सिपाही जिन्होंने ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ विद्रोह किया, जो 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण बना।
  • रानी लक्ष्मीबाई: झाँसी की वीर रानी जिन्होंने 'मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी' का नारा लगाते हुए अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ाई लड़ी और वीरगति प्राप्त की।
  • तात्या टोपे: एक कुशल योद्धा जिन्होंने विद्रोह का नेतृत्व किया और गुरिल्ला युद्ध तकनीकों का इस्तेमाल किया।
  • नाना साहेब: पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र, जिन्होंने कानपुर से विद्रोह का नेतृत्व किया।

इस विद्रोह ने यह साबित कर दिया कि भारतीय चुप बैठने वाले नहीं हैं। इसने भविष्य के आंदोलनों के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

2. राष्ट्रीय जागृति और कांग्रेस का उदय

1857 के विद्रोह के बाद, भारत में राष्ट्रीय चेतना का विकास तेजी से हुआ। 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना ने संगठित राजनीतिक आंदोलनों को एक नई दिशा दी।

  • दादाभाई नौरोजी: 'ग्रैंड ओल्ड मैन ऑफ इंडिया' के नाम से जाने जाते हैं, जिन्होंने ब्रिटिश नीतियों की आर्थिक आलोचना की और 'धन की निकासी' का सिद्धांत प्रस्तुत किया।
  • सुरेन्द्रनाथ बनर्जी: कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में से एक, जिन्होंने राष्ट्रवाद के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • गोपाल कृष्ण गोखले: महात्मा गांधी के राजनीतिक गुरु, जिन्होंने अपने संवैधानिक और अहिंसक तरीकों से ब्रिटिश सरकार पर दबाव बनाया।

कांग्रेस ने शुरुआत में ब्रिटिश सरकार से अधिक अधिकारों की मांग की, लेकिन धीरे-धीरे पूर्ण स्वतंत्रता का लक्ष्य अपनाया।

3. उग्रवादी राष्ट्रवाद का उदय

कांग्रेस के भीतर ही कुछ नेता ऐसे भी थे जो मानते थे कि ब्रिटिश सरकार से केवल याचना करने से आजादी नहीं मिलेगी। उन्होंने अधिक उग्रवादी या क्रांतिकारी तरीकों का समर्थन किया।

  • बाल गंगाधर तिलक: 'स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा' का नारा देने वाले तिलक ने जन-जन तक स्वतंत्रता का संदेश पहुंचाया। उन्होंने गणपति और शिवाजी उत्सवों का आयोजन कर लोगों को एकजुट किया।
  • लाला लाजपत राय: 'पंजाब केसरी' के नाम से प्रसिद्ध, उन्होंने साइमन कमीशन के विरोध में अपने प्राणों की आहुति दी।
  • बिपिन चंद्र पाल: 'लाल-बाल-पाल' की तिकड़ी के सदस्य, जिन्होंने अपने जोशीले भाषणों से लोगों में क्रांति की भावना जगाई।

इन नेताओं ने विदेशी माल का बहिष्कार और स्वदेशी अपनाने पर जोर दिया।

4. क्रांतिकारी आंदोलन

कुछ देशभक्तों का मानना था कि केवल राजनीतिक आंदोलन पर्याप्त नहीं हैं और सशस्त्र क्रांति ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गुप्त क्रांतिकारी संगठनों की स्थापना की।

  • खुदीराम बोस: सबसे कम उम्र के क्रांतिकारियों में से एक, जिन्हें मुजफ्फरपुर षड्यंत्र मामले में फांसी दी गई।
  • भगत सिंह: 'इंकलाब जिंदाबाद' का नारा बुलंद करने वाले भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु ने अपनी शहादत से युवा पीढ़ी को प्रेरित किया। उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के माध्यम से ब्रिटिश सत्ता को चुनौती दी।
  • चंद्रशेखर आजाद: एक महान क्रांतिकारी जिन्होंने कभी भी ब्रिटिश सरकार के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया और अंत तक लड़ते रहे। 'आज़ाद' नाम को सार्थक करते हुए उन्होंने इलाहाबाद में खुद को गोली मार ली ताकि वे अंग्रेजों के हाथ न लगें।
  • सरदार भगत सिंह: (भगत सिंह से अलग) हालाँकि नाम समान है, कई अन्य सरदार भी स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे। (यहां स्पष्टीकरण की आवश्यकता है कि यह भगत सिंह के संदर्भ में है या किसी अन्य)।
  • सूर्य सेन (दा मास्टर): चटगांव शस्त्रागार पर हमले का नेतृत्व करने वाले एक प्रमुख क्रांतिकारी।

इन क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान से ब्रिटिश सरकार को भयभीत कर दिया।

5. महात्मा गांधी का युग: अहिंसा और सत्याग्रह

मोहनदास करमचंद गांधी, जिन्हें 'राष्ट्रपिता' कहा जाता है, भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रमुख नेता बनकर उभरे। उन्होंने अहिंसा और सत्याग्रह के सिद्धांतों पर आधारित जन आंदोलनों का नेतृत्व किया।

  • चंपारण सत्याग्रह (1917): बिहार में किसानों के लिए पहला सत्याग्रह।
  • खेड़ा सत्याग्रह (1918): गुजरात में फसल खराब होने के बावजूद कर माफी के लिए आंदोलन।
  • असहयोग आंदोलन (1920-22): ब्रिटिश सरकार के साथ सभी सहयोग को समाप्त करने का आह्वान, जिसमें सरकारी नौकरियों, स्कूलों और अदालतों का बहिष्कार शामिल था।
  • सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930-34): नमक कानून तोड़ने के लिए दांडी मार्च (नमक सत्याग्रह) इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942): 'करो या मरो' के नारे के साथ अंग्रेजों को भारत छोड़ने के लिए अंतिम और सबसे बड़ा जन आंदोलन।

गांधीजी के नेतृत्व में, स्वतंत्रता संग्राम एक जन आंदोलन बन गया जिसमें समाज के हर वर्ग ने भाग लिया।

6. अन्य महत्वपूर्ण स्वतंत्रता सेनानी

गांधीजी और उग्रवादी नेताओं के अलावा, कई अन्य व्यक्तियों ने भी स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान दिया:

  • सरदार वल्लभभाई पटेल: 'लौह पुरुष' के रूप में जाने जाते हैं, जिन्होंने बारदोली सत्याग्रह का नेतृत्व किया और आजादी के बाद रियासतों के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • जवाहरलाल नेहरू: भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, जिन्होंने कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन (1929) में पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव पारित करवाया।
  • मौलाना अबुल कलाम आज़ाद: कांग्रेस के प्रमुख मुस्लिम नेता और शिक्षाविद, जिन्होंने एकता और धर्मनिरपेक्षता पर जोर दिया।
  • सुभाष चंद्र बोस: 'जय हिंद' का नारा देने वाले बोस ने फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की और 'आजाद हिंद फौज' का गठन कर सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया। उन्होंने 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का प्रसिद्ध नारा दिया।
  • डॉ. भीमराव अंबेडकर: दलितों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले अंबेडकर ने संवैधानिक सुधारों के माध्यम से सामाजिक न्याय की वकालत की।
  • सरोजिनी नायडू: 'भारत की कोकिला' के रूप में जानी जाने वाली सरोजिनी नायडू पहली भारतीय महिला थीं जिन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
  • कस्तूरबा गांधी: महात्मा गांधी की पत्नी, जिन्होंने आंदोलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया और महिलाओं को प्रेरित किया।
  • राजेंद्र प्रसाद: भारत के प्रथम राष्ट्रपति, जिन्होंने चंपारण सत्याग्रह में गांधीजी का साथ दिया और कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
  • विपिन चंद्र पाल: (ऊपर भी उल्लेखित)
  • अल्लूरी सीताराम राजू: आंध्र प्रदेश में आदिवासी विद्रोह का नेतृत्व किया।
  • बिरसा मुंडा: छोटा नागपुर क्षेत्र में आदिवासी आंदोलनों के महान नेता।

इन सभी नेताओं और अनगिनत गुमनाम नायकों के बलिदान और समर्पण के कारण ही भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हो सका।

7. महिला स्वतंत्रता सेनानी

यह समझना महत्वपूर्ण है कि स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने केवल घरों में रहकर ही नहीं, बल्कि मैदान में उतरकर भी लड़ाई लड़ी।

  • कस्तूरबा गांधी
  • सरोजिनी नायडू
  • रानी लक्ष्मीबाई
  • अहिल्याबाई होल्कर (हालांकि उनका समय 1857 से पहले है, उनकी विरासत प्रेरणादायक थी)
  • रानी दुर्गावती (16वीं शताब्दी की योद्धा, लेकिन उनकी वीरता प्रेरणा का स्रोत थी)
  • बेगम हजरत महल (1857 के विद्रोह में अवध का नेतृत्व किया)
  • पद्मा नायडू
  • कमला नेहरू
  • विजयलक्ष्मी पंडित

महिलाओं ने जुलूसों में भाग लिया, गिरफ्तारियां दीं, गुप्त बैठकों का आयोजन किया और स्वतंत्रता का संदेश घर-घर पहुंचाया।

8. स्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाएं

  • बंगाल विभाजन (1905) और स्वदेशी आंदोलन
  • मुस्लिम लीग की स्थापना (1906)
  • जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)
  • चौरी-चौरा कांड (1922) जिसने असहयोग आंदोलन को समाप्त कर दिया
  • साइमन कमीशन का बहिष्कार (1928)
  • पूर्ण स्वराज की घोषणा (1929)
  • नमक सत्याग्रह (1930)
  • गांधी-इरविन समझौता (1931)
  • गोलमेज सम्मेलन
  • भारत छोड़ो आंदोलन (1942)
  • कैबिनेट मिशन (1946)
  • भारत का विभाजन और स्वतंत्रता (1947)

इन घटनाओं ने स्वतंत्रता संग्राम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मुख्य निष्कर्ष

  • 1857 का विद्रोह स्वतंत्रता संग्राम की पहली बड़ी चिंगारी थी।
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संगठित राजनीतिक आंदोलनों का नेतृत्व किया।
  • बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय, बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं ने उग्रवादी राष्ट्रवाद को बढ़ावा दिया।
  • भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने सशस्त्र संघर्ष का मार्ग अपनाया।
  • महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्याग्रह के माध्यम से स्वतंत्रता को एक जन आंदोलन बनाया।
  • सरदार पटेल, नेहरू, बोस, अंबेडकर जैसे नेताओं ने विभिन्न तरीकों से योगदान दिया।
  • महिलाओं ने भी स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
  • 15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ, जो इन सभी वीर आत्माओं के अथक प्रयासों का परिणाम था।

भारत के स्वतंत्रता सेनानियों का इतिहास हमें सिखाता है कि कैसे साहस, दृढ़ संकल्प और एकता हमें किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद कर सकती है। उनके बलिदानों को हमेशा याद रखा जाना चाहिए।

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